वेद के सूक्तों का तात्त्विक रहस्य
‘सूक्त’ शब्द ‘सु’ उपसर्गपूर्वक ‘वच्’ धातु से ‘क्त’ प्रत्यय करने पर व्याकृत होता है। ‘सूक्त’ शब्द का अभिप्राय है- ‘अच्छी रीति से कहा हुआ’। जो वेदमन्त्र समूह एकदैवत्य और एकार्थ-प्रतिपादक हो, उसे ‘सूक्त’ कहा जाता है। बृहद्देवता में सूक्त शब्द का निर्वचन इस प्रकार किया गया है-’सम्पूर्णं ऋषिवाक्यं तु सूक्तामित्यभिधीयते’ [...]
शान्ति मन्त्र
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतये: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वँ शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥Pages
Visitors to this site
-
Blog Stats
- 72,793 hits
Archives
- November 2009 (2)
- October 2009 (1)
- July 2009 (3)
- May 2009 (1)
- April 2009 (8)
- March 2009 (3)
- February 2009 (1)
- January 2009 (1)
- October 2008 (8)
- September 2008 (5)
- August 2008 (9)
- July 2008 (4)
- June 2008 (1)
- May 2008 (1)
-
Recent Comments
- pradeep on हस्तरेखा और आर्थिक सम्पन्नता
- Akshay Singh on देवी कवच-devi kavach
- Akshay Singh on देवी कवच-devi kavach
- Suresh Raikwar on history of pundir- पुण्डीर
- pratibha singh on history of pundir- पुण्डीर
-
Top Clicks
Feed
-
Flickr Photos





More Photos -


