August 30, 2008 – 4:10 pm
तिथि
अंग्रेजी पंचांग के अनुसार दिन का आरम्भ मध्य रात्रि से माना जाता है। इसका समय निर्धारण मध्याह्न सूर्य से ही होता है, किन्तु तिथि के आरम्भ का आधार एक मान्यता एवं अन्तर्राष्ट्रीय समझौते पर ही आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है, जबकि भारतीय पंचांगों में तिथि का आधार पूर्ण वैज्ञानिक है जो चन्द्रमा [...]
By aspundir
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August 28, 2008 – 9:22 pm
देवोपासना के कुछ सरल उपाय
देवताओं की उपासना की अनेक विधियाँ शास्त्रों में दी गई है। उन विधियों का पालन करने से अपने इष्ट की कृपा सहज ही प्राप्त की जा सकती है। उनमें से ही कुछ सरल उपाय यहाँ प्रस्तुत है।-
१॰ प्रत्येक मंगलवार को हनुमान जी को सिन्दूर चढ़ाना तथा उनके गले में राम-नाम अंकित [...]
August 27, 2008 – 9:53 pm
।। श्री कनकधारा स्तोत्रम् ।।
अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।
अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।।
मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।।
विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।।
आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।
आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।।
बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु [...]
August 23, 2008 – 11:04 pm
प्राणेश्वर श्रीकृष्ण
मंत्र- “ॐ ऐं श्रीं क्लीं प्राण-वल्लभाय सौः सौभाग्यदाय श्रीकृष्णाय स्वाहा।” (22)
विनियोगः- ॐ अस्य श्रीप्राणेश्वर-श्रीकृष्ण-मंन्त्रस्य भगवान् श्रीवेदव्यास ऋषिः, गायत्री छंदः, श्रीकृष्ण-परमात्मा देवता, क्लीं बीजं, श्रीं शक्तिः, ऐं कीलकं, ॐ व्यापकः, मम समस्त-क्लेश-परिहार्थं, चतुर्वर्ग-प्राप्तये, सौभाग्य-वृद्धयर्थं च जपे विनियोगः।
ऋष्यादि-न्यासः- श्रीवेदव्यास ऋषये नमः शिरसि, गायत्री छंदसे नमः मुखे, श्रीकृष्ण-परमात्मा देवतायै नमः हृदि, क्लीं बीजाय नमः गुह्ये, श्रीं शक्तये [...]
August 21, 2008 – 10:56 pm
।। त्रैलोक्य मंगल सूर्य कवच।।
।।पूर्व पीठीका: श्री सूर्योवाच।।
साम्ब साम्ब महाबाहो ! श्रृणु मे कवचं शुभम्।
त्रैलोक्य मंगलं नाम, कवचं परमाद्भुतम्।।
यद् ज्ञात्वा मन्त्र वित् सम्यक्, फलं निश्चितम्।
यद् धृत्वा च महा देवो, गणानामधिपोऽभवत्।।
पठनाद्धारणाद्विष्णुः, सर्वेषां पालकः सदा।
एवमिन्द्रादयः सर्वे, सर्वैश्वर्यमवाप्रुवन्।।
विनियोग:- ॐ अस्य श्रीसूर्य कवस्य ब्रह्मा ऋषि, अनुष्टुप छन्दः, सर्वदेव नमस्कृत श्रीसूर्योदेवता, यशारोग्य मोक्षेषु पाठे विनियोगः।
ऋष्यादिन्यासः – शिरसि श्रीब्रह्मार्षये नमः। मुखे [...]
August 12, 2008 – 10:35 pm
गणेशजी को दूर्वा, शमीपत्र तथा मोदक चढ़ाने का रहस्य -
गणेशजी को तुलसी छोड़कर सभी पत्र-पुष्प प्रिय हैं। अतः सभी अनिषिद्ध पत्र-पुष्प इन पर चढ़ाये जा सकते हैं।
तुलसीं वर्जयित्वा सर्वाण्यपि पत्रपुष्पाणि गणपतिप्रियाणि। (आचारभूषण)
गणपति को दूर्वा अधिक प्रिय है। अतः इन्हें सफेद या हरी दूर्वा अवश्य चढ़ानी चाहिये। दूर्वा की फुनगी में तीन या पाँच पत्ती होनी [...]
August 10, 2008 – 8:37 pm
सर्वप्रथम गणेश का ही पूजन क्यों ?
हिन्दू धर्म में किसी भी शुभ कार्य का आरम्भ करने के पूर्व गणेश जी की पूजा करना आवश्यक माना गया है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता व ऋद्धि-सिद्धि का स्वामी कहा जाता है। इनके स्मरण, ध्यान, जप, आराधना से कामनाओं की पूर्ति होती है व विघ्नों का विनाश होता है। वे [...]
August 8, 2008 – 11:42 am
महिमा तिलक की
स्नान एवं धौत वस्त्र धारण करने के उपरान्त वैष्णव ललाट पर ऊर्ध्वपुण्ड्र, शैव त्रिपुण्ड, गाणपत्य रोली या सिन्दूर का तिलक शाक्त एवं जैन क्रमशः लाल और केसरिया बिन्दु लगाते हैं। दिगम्बर जैन सम्प्रदाय में केसरिया तिलक तथा बौद्धों में श्वेताम्बर मतावलम्बियों के समान ही बिन्दु मस्तक पर धारण करते हैं।
नारद पुराण में उल्लेख [...]
चन्द्र-ग्रहण
निकट भविष्य में १६/१७ अगस्त २००८ को चन्द्र ग्रहण होना है। यह ग्रहण श्रावण शुक्ल, शनिवार को मध्यवर्त्ती रात्री में पूरे भारत में खण्डग्रास के रुप में दिखाई देगा। इस ग्रहण का प्रारम्भ, मध्य एवं समाप्तिकाल इस प्रकार है-
ग्रहण प्रारम्भ १॰०५ घं॰मि॰, ग्रहण मध्य २॰४० घं॰मि॰, ग्रहण समाप्त ४॰१४ घं॰मि॰ पर्व काल ३॰०९ घं॰मि॰ परमग्रास [...]