।। त्रैलोक्य मंगल सूर्य कवच।।
।।पूर्व पीठीका: श्री सूर्योवाच।।
साम्ब साम्ब महाबाहो ! श्रृणु मे कवचं शुभम्।
त्रैलोक्य मंगलं नाम, कवचं परमाद्भुतम्।।
यद् ज्ञात्वा मन्त्र वित् सम्यक्, फलं निश्चितम्।
यद् धृत्वा च महा देवो, गणानामधिपोऽभवत्।।
पठनाद्धारणाद्विष्णुः, सर्वेषां पालकः सदा।
एवमिन्द्रादयः सर्वे, सर्वैश्वर्यमवाप्रुवन्।।
विनियोग:- ॐ अस्य श्रीसूर्य कवस्य ब्रह्मा ऋषि, अनुष्टुप छन्दः, सर्वदेव नमस्कृत श्रीसूर्योदेवता, यशारोग्य मोक्षेषु पाठे विनियोगः।
ऋष्यादिन्यासः – शिरसि श्रीब्रह्मार्षये नमः। मुखे [...]
शान्ति मन्त्र
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतये: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वँ शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥Pages
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