।। श्री कनकधारा स्तोत्रम् ।।
अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।
अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।।
मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।
माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।।
विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।
ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।।
आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।
आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।।
बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।
कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु [...]
शान्ति मन्त्र
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतये: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वँ शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥Pages
Visitors to this site
-
Blog Stats
- 72,793 hits
Archives
- November 2009 (2)
- October 2009 (1)
- July 2009 (3)
- May 2009 (1)
- April 2009 (8)
- March 2009 (3)
- February 2009 (1)
- January 2009 (1)
- October 2008 (8)
- September 2008 (5)
- August 2008 (9)
- July 2008 (4)
- June 2008 (1)
- May 2008 (1)
-
Recent Comments
- pradeep on हस्तरेखा और आर्थिक सम्पन्नता
- Akshay Singh on देवी कवच-devi kavach
- Akshay Singh on देवी कवच-devi kavach
- Suresh Raikwar on history of pundir- पुण्डीर
- pratibha singh on history of pundir- पुण्डीर
-
Top Clicks
Feed
-
Flickr Photos





More Photos -


