लक्ष्मी ध्यान
(१)
सहस्त्रदलपद्मस्य कर्णिकावासिनीं पराम्।
शरत्पार्वणकोटीन्दुप्रभाजुष्टवराम्बराम्।।
स्वतेजसा प्रज्वलन्तीं सुखदृश्यां मनोहराम्।
प्रतप्तकाञ्चननिभां शोभां मूर्तिमतीं सतीम्।।
रत्नभूषणभूषाढ्यां शाभितां पीतवाससा।
ईषद्धास्यप्रसन्नास्यां शश्वत्सुस्थिरयौवनाम्।।
सर्वसम्पत्प्रदात्रीं च महालक्ष्मीं भजे शुभाम्।
(ब्रह्मवैवर्त्त पुराण।प्रकृतिखण्ड।३९।१०-१२॰५)
भावार्थः- परम-पूज्या भगवती महालक्ष्मी सहस्त्र दलवाले कमल की कर्णिकाओं पर विराजमान हैं। इनकी सुन्दर साड़ी शरत्पूर्णिमा के करोड़ों चन्द्रमाओं की शोभा से सम्पन्न है। ये परम साध्वी देवी स्वयं अपने तेज से प्रकाशित हो रही है। इन परम [...]
शान्ति मन्त्र
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतये: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वँ शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥Pages
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