Monthly Archives: April 2009

श्री हनुमद्ष्टोत्तर-शत-नामावली

श्री हनुमद्ष्टोत्तर-शत-नामावली
ॐ आंजनेयाय विद्महे महाबलाय धीमहि तन्नो हनुमान प्रचोदयात्
ॐ आंजनेयाय नमः।
ॐ महा-वीराय नमः।
ॐ हनुमते नमः।
ॐ मारूतात्मजाय नमः।
ॐ तत्त्व-ज्ञान-प्रदाय नमः।
ॐ सीता-देवी-मुद्रा-प्रदायकाय नमः।
ॐ अशोक-वनिका-छेत्रे-नमः।
ॐ सर्व-माया-विभंजनाय नमः।
ॐ सर्व-बन्ध-विमोक्त्रे नमः।
ॐ रक्षो-विध्वंस-कारकाय नमः।
ॐ पर-विद्या-परीहाराय नमः।
ॐ पर-शौर्य-विनाशनाय नमः।
ॐ पर-मन्त्र-निराकत्र्रे नमः।
ॐ पर-यन्त्र-प्रभेदकाय नमः।
ॐ सर्व-ग्रह-विनाशाय नमः।
ॐ भीमसेन-सहाय-कृते नमः।
ॐ सर्व-दुःख-हराय नमः।
ॐ सर्व-लोक-चारिणे नमः।
ॐ मनोजवाय नमः।
ॐ पारिजात-द्रुम-मूलस्थाय नमः।
ॐ सर्व-मन्त्र-स्वरूपवते नमः।
ॐ सर्व-तन्त्र-स्वरूपाय नमः।
ॐ सर्व-यन्त्रात्मकाय नमः।
ॐ शिवाय [...]

निवास स्थान का चयन

निवास स्थान का चयन
स्वरशास्त्रानुसार किसी व्यक्ति के निवास के लिये उपयुक्त नगर और उसकी दिशा का चयन करते हैं।
सबसे पहले हम निवास के लिये उपयुक्त नगर के चयन को लेते हैं। नगर का चयन दो प्रकार से किया जाता है।
१॰ नगर और व्यक्ति की नामराशियों से।
२॰ नगर और व्यक्ति की कांकिणी संख्या के अनुसार।
नगर और [...]

हस्तरेखा और आर्थिक सम्पन्नता

हस्तरेखा और आर्थिक सम्पन्नता
॰ यदि अंगुलियों कर पर्व लम्बे हो तो जातक धनी होने के साथ-साथ दीर्घायु भी प्राप्त करता है।
॰ यदि कनिष्ठा अँगुली का नाखुन अनामिका अँगुली के द्वितीय पर्व से आगे निकलकर तीसरे पर्व तक जाये तो जातक को कभी भी धन का अभाव नहीं होता।
॰ यदि कनिष्ठा एवं अनामिका अँगुली के आपस [...]

गोवर्धन पर्वत धारण करने पर नीचे की भुमि जलमग्न क्यों नहीं हुई?

गोवर्धन पर्वत धारण करने पर नीचे की भुमि जलमग्न क्यों नहीं हुई?
एक समय शिवजी ने पार्वती जी के सामने सन्तों की बड़ी महिमा गाई। सन्तों की महिमा सुनकर पार्वती जी की श्रद्धा उमड़ी और उसी दिन उन्होंने श्री अगस्त्य मुनि को भोजन का निमन्त्रण दे डाला तथा शिवजी को बाद में इस बाबत बतलाया तो [...]

शंकराचार्य परम्परा

शंकराचार्य परम्परा
आद्यगुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म के कल्याणार्थ सम्पूर्ण भारत में पृथक्-पृथक् दिशाओं में चार मठों की स्थापना की। ये मठ हैं-
१॰ वेदान्त ज्ञानमठ, श्रृंगेरी (दक्षिण भारत)
२॰ गोवर्धन मठ, जगन्नाथपुरी (पूर्वी भारत)
३॰ शारदा (कालिका) मठ, द्वारका (पश्चिम भारत)
४॰ ज्योतिर्पीठ, बद्रिकाश्रम (उत्तर भारत)
शंकराचार्य जी ने इन मठों की स्थापना के साथ-साथ उनके मठाधीशों की भी नियुक्ति [...]

सीता स्वयंवर में अयोध्या नरेश को आमंत्रण क्यों नहीं?

सीता स्वयंवर में अयोध्या नरेश को आमंत्रण क्यों नहीं?
राजा जनक के शासनकाल में एक व्यक्ति का विवाह हुआ। जब वह पहली बार सज-सँवरकर ससुराल के लिए चला, तो रास्ते में चलते-चलते एक जगह उसको दलदल मिला, जिसमें एक गाय फँसी हुई थी, जो लगभग मरने के कगार पर थी। उसने विचार किया कि गाय तो [...]

ग्रह पीड़ा निवारक टोटके

ग्रह पीड़ा निवारक टोटके-
सूर्य
१॰ सूर्य को बली बनाने के लिए व्यक्ति को प्रातःकाल सूर्योदय के समय उठकर लाल पूष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल से सींचना चाहिए।
२॰ रात्रि में ताँबे के पात्र में जल भरकर सिरहाने रख दें तथा दूसरे दिन प्रातःकाल उसे पीना चाहिए।
३॰ ताँबे का कड़ा दाहिने हाथ में धारण किया जा [...]

व्यवसाय वृद्धि-कारक प्रयोग

व्यवसाय वृद्धि-कारक प्रयोग
१॰ दुकान में लोबान की धूप लगानी चाहिए।
२॰ शनिवार के दिन दुकान के मुख्य द्वार पर बेदाग नींबू एवं सात मिर्चें लटकानी चाहिए।
३॰ नागदमन के पौधे की जड़ लाकर इसे दुकान के बाहर लगा देना चाहिए। इससे बंधी दुकान खुल जाती है।
४॰ दुकान के गल्ले में शुभ मुहूर्त में श्रीफल लाल वस्त्र में [...]