श्री सूर्य अष्टोत्तरशत नामावली
ॐ ह्रीं अरूणाय नम:
ॐ ह्रीं शरण्याय नम:
ॐ ह्रीं करूणा-रस-सिन्धवे नम:
ॐ ह्रीं असमान-बलाय नम:
ॐ ह्रीं आर्त-रक्षकाय नम:
ॐ ह्रीं आदित्याय नम:
ॐ ह्रीं आदि-भूताय नम:
ॐ ह्रीं अखिलागम-वेदिने नम:
ॐ ह्रीं अच्युताय नम:
ॐ ह्रीं अखिज्ञाय नम:
ॐ ह्रीं अनन्ताय नम:
ॐ ह्रीं इनाय नम:
ॐ ह्रीं विश्व-रूपाय नम:
ॐ ह्रीं इज्याय नम:
ॐ ह्रीं इन्द्राय नम:
ॐ ह्रीं भानवे नम:
ॐ ह्रीं इन्दिरा-मिन्दराप्ताय नम:
ॐ ह्रीं वन्दनीयाय नम:
ॐ ह्रीं ईशाय नम:
ॐ ह्रीं सु-प्रसन्नाय नम:
ॐ ह्रीं सुशीलाय नम:
ॐ ह्रीं सू-वर्चसे नम:
ॐ ह्रीं वसु-प्रदाय नम:
ॐ ह्रीं वसवे नम:
ॐ ह्रीं वासुदेवाय नम:
ॐ ह्रीं उज्जवलाय नम:
ॐ ह्रीं उग्र-रूपाय नम:
ॐ ह्रीं ऊध्र्वगाय नम:
ॐ ह्रीं विवस्वते नम:
ॐ ह्रीं उद्यित्करण-जालाय नम:
ॐ ह्रीं हृषीकेशाय नम:
ॐ ह्रीं ऊर्जस्वलाय नम:
ॐ ह्रीं वीराय नम:
ॐ ह्रीं निर्जराय नम:
ॐ ह्रीं जयाय नम:
ॐ ह्रीं ऊरू-द्वयभाव-रूपयुक्त-सारथये नम:
ॐ ह्रीं ऋणि-बन्धाय नम:
ॐ ह्रीं रूग्-हन्त्रे नम:
ॐ ह्रीं ऋक्ष-चक्र-चराय नम:
ॐ ह्रीं ऋजु-स्वभाव-चित्ताय नम:
ॐ ह्रीं नित्य-स्तुताय नम:
ॐ ह्रीं ऋकार-मातृका-वर्णरूपाय नम:
ॐ ह्रीं उज्जवलत्-तेजसे नम:
ॐ ह्रीं ऋक्षादि-नाथ-मित्राय नम:
ॐ ह्रीं पुष्कराक्षाय नम:
ॐ ह्रीं लुप्त-दन्ताय नम:
ॐ ह्रीं शान्ताय नम:
ॐ ह्रीं कान्तिदाय नम:
ॐ ह्रीं घनाय नम:
ॐ ह्रीं कनत्-कनक-भूषाय नम:
ॐ ह्रीं खद्योताय नम:
ॐ ह्रीं ऊनिताखिल-दैत्याय नम:
ॐ ह्रीं सत्यानन्द-स्वरूपिणे नम:
ॐ ह्रीं अपवर्ग-प्रदाय नम:
ॐ ह्रीं आर्त-शरण्याय नम:
ॐ ह्रीं एकाकिने नम:
ॐ ह्रीं भगवते नम:
ॐ ह्रीं सृष्टि-स्थित्यन्त-कारिणे नम:
ॐ ह्रीं गुणात्मने नम:
ॐ ह्रीं घृणि-भृते नम:
ॐ ह्रीं बृहते नम:
ॐ ह्रीं ब्रह्मणे नम:
ॐ ह्रीं ऐश्वर्यदाय नम:
ॐ ह्रीं शर्वाय नम:
ॐ ह्रीं हरिश्वाय नम:
ॐ ह्रीं शौरये नम:
ॐ ह्रीं दश-दिक्-सम्प्रकाशाय नम:
ॐ ह्रीं भक्त-वश्याय नम:
ॐ ह्रीं ऊर्जस्कराय नम:
ॐ ह्रीं जयिने नम:
ॐ ह्रीं जगदानन्द-हेतवे नम:
ॐ ह्रीं जन्म-मृत्यु-जरा-व्याधि-वर्जिताय नम:
ॐ ह्रीं उच्च-स्थान-समारूढ-रथस्थाय नम:
ॐ ह्रीं असुरारये नम:
ॐ ह्रीं कमनीय-कराय नम:
ॐ ह्रीं अब्ज-वल्लभाय नम:
ॐ ह्रीं अन्तर्बहि:-प्रकाशाय नम:
ॐ ह्रीं अचिन्त्याय नम:
ॐ ह्रीं आत्म-स्पिणे नम:
ॐ ह्रीं अच्युताय नम:
ॐ ह्रीं अमरेशाय नम:
ॐ ह्रीं परस्मै ज्योतिषे नम:
ॐ ह्रीं अहस्कराय नम:
ॐ ह्रीं रवये नम:
ॐ ह्रीं हरये नम:
ॐ ह्रीं परमात्मने नम:
ॐ ह्रीं तरूणाय नम:
ॐ ह्रीं वरेण्याय नम:
ॐ ह्रीं ग्रहाणांपतये नम:
ॐ ह्रीं भास्कराय नम:
ॐ ह्रीं आदि-मध्यान्त-रहिताय नम:
ॐ ह्रीं सौख्य-प्रदाय नम:
ॐ ह्रीं सकल-जगतांपतये नम:
ॐ ह्रीं सूर्याय नम:
ॐ ह्रीं कवये नम:
ॐ ह्रीं नारायणाय नम:
ॐ ह्रीं परेशाय नम:
ॐ ह्रीं तेजो-रूपाय नम:
ॐ ह्रीं श्रीहिरण्य-गर्भाय नम:
ॐ ह्रीं सम्पत्कराय नम:
ॐ ह्रीं इष्टार्थदाय नम:
ॐ ह्रीं अनुप्रसन्नाय नम:
ॐ ह्रीं श्रीमते नम:
ॐ ह्रीं श्रेयसे नम:
ॐ ह्रीं भक्त-कोटि-सौख्य-प्रदायिने नम:
ॐ ह्रीं निखिलागम-वेद्याय नम:
ॐ ह्रीं नित्यानन्दाय नम:
ॐ ह्रीं छाया-उषा-देवी-समेताय नम:
शान्ति मन्त्र
ॐ द्यौ: शान्तिरन्तरिक्षँ शान्ति: पृथिवी शान्तिराप: शान्तिरोषधय: शान्ति: । वनस्पतये: शान्तिर्विश्वे देवा: शान्तिर्ब्रह्म शान्ति: सर्वँ शान्ति: शान्तिरेव शान्ति: सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति: ॥Pages
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4 Comments
shriman kripya mujhe chandra grahan ka prabhav rashiyo par kaisa aur kab tak rahega aur iske upay bhi bataye.meri kumbh rashi hai to kripya upay jaldi batayekal grahan hai.
aur mujhe jaldi naukri pane ka koi totka bataye jo asan ho aur prabhavi ho.
jai ho aap ki aap ki kirapa mujh par banee rahe
Dear sir,
aapka bhaut he dhnayawad jo aesi jankari de.muje rinmochak estrotr,aur mahalakshmi estrotr send kare.
Regards
pankaj tyagi